Saudi Arab : रियाद में भूख से मरा भारतीय युवा , शव लौटा घर

Saudi Arab : एक भारतीय युवा को कथित तौर पर भारत में भर्ती एजेंटों द्वारा धोखा दिया गया था और अब खबर सामने आ रही है की हाल ही में रेगिस्तान में खो जाने के बाद भारतीय व्यक्ति भूख से मर गया। मृतक का नाम लम जुनेद है जो केवल 22 वर्ष का ही था। […]

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4 months ago - 16:40
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Saudi Arab : रियाद में भूख से मरा भारतीय युवा , शव लौटा घर

Saudi Arab : एक भारतीय युवा को कथित तौर पर भारत में भर्ती एजेंटों द्वारा धोखा दिया गया था और अब खबर सामने आ रही है की हाल ही में रेगिस्तान में खो जाने के बाद भारतीय व्यक्ति भूख से मर गया। मृतक का नाम लम जुनेद है जो केवल 22 वर्ष का ही था। काम उम्र में ही अपने परिवार की जिम्मेदारी सँभालने के लिए वो सऊदी नौकरी करने गया था। उसने अपने परिवार के लिए एक उज्ज्वल भविष्य और माता-पिता का समर्थन करने का सपना देखा था,उसे सुपरमार्केट में सेल्समैन की नौकरी मिली थी लेकिन किन्हीं कारणों से वो रियाद से 600 किमी दूर वाडी दावासिर इलाके में ऊंट चराने वाला बन गया।

मृतक उत्तर प्रदेश का

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मृतक उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर का मूल निवासी था , बिना रास्ता जाने रेत के टीलों में लगभग सैकड़ों किलोमीटर वह पैदल चला। उनकी मृत्यु के लगभग 15 दिन बाद सितंबर में किसी ने उसका शव देखा और पुलिस को सूचित किया की एक क्षत-विक्षत शव मिला। शव के पास दो जोड़ी कपड़े और एक पासपोर्ट कॉपी वाला एक छोटा बैग मिला जिससे उसकी पहचान हो गई। जूनेड के शरीर को कथित तौर पर रेगिस्तानी चींटियों ने आंशिक रूप से खा लिया था। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने उनकी मौत के चार महीने बाद हाल ही में उनका शव घर भेजा है।

वादी अल-दावसीर रब अल खली के किनारे पर स्थित है, जिसे खाली क्वार्टर के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसकी bone-dry surface कुछ बेडौइन जो इसे मौसमी रूप से उपयोग करते हैं उसको छोड़कर किसी को भी वहां रहने से discourages कर सकती है। रेगिस्तान में navigation अत्यंत कठिन है।

चारों और रेगिस्तान

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आप जहां देखेंगे आपको वहां बस रेत ही दिखेगा। यहां जब व्यक्ति बहुत दूर तक सफर कर लेता है तब उसे एहसास होता है की वो खो गया है। रौशनी आँखों में चुभती है। मन में भ्रम पैदा हो जाता है. पहले ही गर्मी की वजह से सब धुँधला होता है जहाँ तापमान 50 सेल्सियस से ऊपर बढ़ जाता है।

यह लोगों के लिए मौत के जाल की तरह है, खासकर भारतीयों के लिए जो रेतीले इलाकों से परिचित नहीं होते है । कुछ भारतीय, जिन्हें भर्ती एजेंसियों ने अपने देश में धोखा दिया था, ऊंट चराने वाले के रूप में इन रेगिस्तानों में आ गए। एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता सिधिख तुव्वुर ने 51 भारतीय ऊंट चरवाहों को सऊदी अधिकारियों की मदद से घर लौटने में मदद की है, जो कथित तौर पर धोखाधड़ी के तरीकों से रूब अल खली रेगिस्तान में उतरे थे।

 

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