• बांग्लादेश की हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल पर BJP का तीखा हमला
  • तसलीमा नसरीन की पोस्ट से सियासी बयानबाज़ी तेज
  • अमित मालवीय ने ममता सरकार पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए
  • कोलकाता में प्रदर्शन और लाठीचार्ज ने बढ़ाया राजनीतिक तनाव
नई दिल्ली (Vews News): बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा को लेकर भारतीय राजनीति में एक बार फिर उबाल देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की स्थिति अब पड़ोसी देश बांग्लादेश जैसी ही असुरक्षित होती जा रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की घटनाओं से जुड़ा एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा के केंद्र में है। बांग्लादेश की मशहूर लेखिका और कवयित्री Taslima Nasreen ने अपने पोस्ट में चटगांव के राउज़ान इलाके के वीडियो साझा किए। पोस्ट में दावा किया गया कि वहां एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घरों को बाहर से बंद कर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वीडियो में जले हुए मकानों के दृश्य दिखाई देते हैं, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं। इस पोस्ट को BJP के आईटी सेल प्रमुख Amit Malviya ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर साझा किया। मालवीय ने लिखा कि जहां बांग्लादेश में कट्टरपंथी भीड़ हिंदुओं का शिकार कर रही है, वहीं पश्चिम बंगाल में उन्हीं घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले हिंदुओं पर राज्य की पुलिस कार्रवाई कर रही है। उनका इशारा मंगलवार को कोलकाता में हुए उस प्रदर्शन की ओर था, जहां हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता बांग्लादेश में एक हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या के विरोध में बांग्लादेश के उप उच्चायोग के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी। मालवीय ने इस पुलिस कार्रवाई को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee से जोड़ते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज उनकी जिम्मेदारी तय करता है। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल बताया। उधर, तसलीमा नसरीन ने अपने पोस्ट में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक वहां की हिंदू आबादी इस तरह की हिंसा झेलती रहेगी और क्या सरकार दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करेगी या फिर इस मुद्दे को नजरअंदाज कर देगी। पूरा मामला अब सिर्फ एक देश की हिंसा तक सीमित नहीं रहा। यह भारत के भीतर राजनीतिक बहस, विरोध-प्रदर्शन और राज्य सरकार बनाम विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।