Bengal Election Heat: पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का काउंटडाउन शुरू होते ही राजनीतिक जंग एक बार फिर तीखी होती दिखाई दे रही है। आरोपों की बौछार और पोस्टरों की राजनीति के बीच बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ऐसा हमला किया है जिसने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है।

राज्य बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर से करते हुए एक विवादित पोस्ट जारी की है। मोर्फिंग तकनीक से बनाई गई इस तस्वीर में दोनों के आधे-आधे चेहरे जोड़कर दिखाए गए हैं। कैप्शन में लिखा गया— “तानाशाह तिलमिला गया है।”

यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है जब बंगाल में चुनावी जमीन पहले से ही तप रही है और हर दल जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हर हथकंडा आजमा रहा है। लेकिन बीजेपी की यह आक्रामक रणनीति बंगाल की राजनीति को एक नए मोड़ पर ले जाती दिख रही है।

हिटलर तुलना पर राजनीतिक घमासान

बीजेपी ने इस तस्वीर के साथ सत्ताधारी TMC पर सीधा निशाना साधते हुए दावा किया कि राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर मुख्यमंत्री जनता को “गुमराह” कर रही हैं।

हाल ही में ममता बनर्जी ने कहा था कि वह SIR का फॉर्म नहीं भरेंगी। इस बयान के बाद BJP आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक बड़ा दावा किया—
उन्होंने कहा कि “सच यह है कि ममता बनर्जी ने अपना SIR फॉर्म पहले ही भरकर 11 दिसंबर 2025 को चुनाव अधिकारी को सौंप दिया था।”

मालवीय ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का बयान केवल भ्रम फैलाने की कोशिश थी, जबकि वास्तविकता इसके ठीक उलट है।

उनके मुताबिक, ममता बनर्जी के विरोध के बावजूद राज्य में जनता ने भारी संख्या में SIR फॉर्म भरे और आयोग को समयसीमा बढ़ाने की कोई जरूरत महसूस नहीं हुई।

चुनावी मौसम में नई तरह की पोस्टर राजनीति

बंगाल की राजनीति में पोस्टरों और तंज भरे कैंपेन की परंपरा पुरानी रही है, लेकिन किसी राष्ट्रीय नेता की तुलना हिटलर से करना इस बार की सियासत को बेहद असामान्य और तीखा बना देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट उस वातावरण का संकेत है जिसमें आने वाले महीनों में बंगाल की चुनावी राजनीति और भी अधिक टकरावपूर्ण हो सकती है।

TMC की प्रतिक्रिया का इंतजार

BJP की इस आक्रामक डिजिटल रणनीति के बाद अब सबकी निगाहें TMC की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह विवाद अब चुनावी बयानबाजी को और तीखा कर सकता है।

चुनाव नजदीक हैं, राजनीतिक गर्मी बढ़ रही है, और बंगाल एक बार फिर राष्ट्रीय सियासत का केंद्र बनने लगा है—जहां हर पोस्ट, हर बयान और हर आरोप चुनावी हवा का रुख बदलने की क्षमता रखता है।