देश की टैक्स संरचना में इनकम टैक्स और जीएसटी के बाद अब अगला बड़ा बदलाव सीमा शुल्क (कस्टम) व्यवस्था में हो सकता है। शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसा संकेत दिया कि बजट 2025 में सरकार कस्टम फ्रेमवर्क से जुड़ा एक बड़ा कदम उठा सकती है—एक ऐसा कदम जिसे उद्योग जगत लंबे समय से मांग रहा है।
कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने साफ कहा कि
उनके इस बयान ने कारोबारियों और आयात-निर्यात से जुड़े सेक्टर में नई उम्मीद जगा दी है।
क्यों जरूरी है कस्टम सिस्टम में सुधार?
देश में अभी भी कई पोर्ट्स पर मैन्युअल जांच, सैंपल टेस्टिंग में देरी और मानवीय हस्तक्षेप जैसे मुद्दों के कारण व्यापारियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार मामूली तकनीकी त्रुटियों के कारण माल अटक जाता है, जिससे सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ता है।
वित्त मंत्री ने माना कि—
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई कैटेगरी के आयात शुल्क कम किए गए हैं, और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी संशोधन की संभावनाएं खुली हैं।
बजट 2025 में क्या हो सकता है?
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कस्टम प्रोसेस को पूरी तरह डिजिटल करने का रोडमैप
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पोर्ट-लेवल जांच और सैंपलिंग प्रक्रिया में बड़े बदलाव
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आयात शुल्क को नई कैटेगरी के हिसाब से री-अलाइन करने का ऐलान
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‘फिजिकल इंटरफ़ेस कम, ऑटोमेशन ज़्यादा’ मॉडल की शुरुआत
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह सुधार व्यापारियों के लिए वैसा ही बड़ा बदलाव साबित हो सकता है जैसा इनकम टैक्स पोर्टल रीडिज़ाइन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में देखने को मिला था।
अर्थव्यवस्था पर भरोसा: विकास दर 7% से ऊपर रहने की उम्मीद
सीतारमण ने कार्यक्रम में यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की विकास दर 7% या उससे अधिक रह सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रही है।
मुफ़्त की रेवड़ियों पर फिर खुलकर बोलीं वित्त मंत्री
राजनीतिक हलकों में चर्चा का कारण बने ‘फ्रीबी’ मॉडल पर भी वित्त मंत्री ने कड़ा रुख दिखाया।
उन्होंने कहा—
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र किसी राज्य को फ्रीबी मॉडल खत्म करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, लेकिन वित्तीय संतुलन सुधारने में जरूर मदद कर सकता है।
कई राज्य अपने ऋण को पुनर्गठित करने के लिए केंद्र से परामर्श ले रहे हैं, क्योंकि “पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेना सबसे खतरनाक स्थिति होती है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रीबी संस्कृति पर यह टिप्पणी बजट से पहले राजनीतिक और आर्थिक बहस को और तेज कर सकती है।