हरियाणा (न्यूज़ डेस्क): कहते हैं कि सफलता की सीढ़ी चढ़ना जितना मुश्किल है उस शिखर पर खुद को संभाल कर रखना उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण। हरियाणवी संगीत जगत के उभरते सितारे मासूम शर्मा इस समय अपनी गायकी से ज्यादा अपने 'मिजाज' को लेकर चर्चा में हैं। 'यारी' जैसे सुपरहिट गानों से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले इस कलाकार का एक ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है जिसने कलाकार और सम्मान के रिश्ते पर एक नई बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान, जहाँ हज़ारों की भीड़ मासूम की आवाज़ पर झूमने आई थी, वहां अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के मुताबिक, स्टेज पर कुछ गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे जिनमें एक पूर्व सरपंच भी शामिल थे। जब सरपंच ने गायक से कुछ संवाद करना चाहा, तो मासूम शर्मा अपना आपा खो बैठे। उन्होंने न केवल सार्वजनिक रूप से उन्हें टोका, बल्कि बेहद आक्रामक अंदाज में मर्यादा की सीमा लांघ दी।

"न मंत्री, न सरपंच... देखना है तो नीचे बैठो"

मासूम शर्मा के तेवर इतने तीखे थे कि उन्होंने माइक पर ही एलान कर दिया कि वे किसी विधायक, मंत्री या सरपंच को कुछ नहीं समझते। उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा, "देखना है तो नीचे बैठकर देखो, वरना चले जाओ।" इस दौरान मंच पर मौजूद पुलिसकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते दिखे। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक पुलिस अधिकारी गायक को शांत करने या वहां से हटाने की कोशिश कर रहा है लेकिन मासूम शर्मा के तेवर कम नहीं हुए।

स्टारडम या अहंकार? सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

यह घटना सिर्फ एक गायक और एक दर्शक के बीच का विवाद नहीं रह गई है। नेटिजन्स अब मासूम शर्मा की इस हरकत को 'अहंकार' का नाम दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि जिस जनता ने कलाकार को सिर-आंखों पर बिठाया, उसी का अपमान करना पतन की शुरुआत है। कई यूजर्स ने लिखा कि "खानदानी रईसी और नई दौलत का फर्क" मासूम के व्यवहार में साफ झलक रहा है।

हरियाणवी संस्कृति में सरपंच और बुजुर्गों का एक विशेष स्थान होता है। ऐसे में एक युवा कलाकार द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी ने न केवल उनके फैंस को निराश किया है बल्कि संगीत जगत के जानकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या 'फेम' के साथ जिम्मेदारी और शालीनता कहीं पीछे छूटती जा रही है?