कराची में ‘सिंधुदेश’ की आग भड़की: मुनीर विवाद और इमरान संकट के बीच पाकिस्तान में नया उबाल, 45 गिरफ्तार
इस्लामाबाद/कराची—पाकिस्तान इन दिनों एक साथ कई मोर्चों पर उथल-पुथल झेल रहा है। पहले चीफ जस्टिस क़ाज़ी फ़ाइज़ ईसा के बाद अब मुनीर के विवादित प्रमोशन ने न्यायपालिका में भूचाल ला दिया है। जजों और वकीलों के सामूहिक इस्तीफों की खबरें सामने आ रही हैं और शहबाज शरीफ सरकार पर “संविधान की हत्या” के आरोप लग रहे हैं। इसी बीच अमेरिका में मुनीर पर प्रतिबंध लगाने की मांग ने इस विवाद को वैश्विक स्तर तक पहुंचा दिया है।
लेकिन इन राजनीतिक संकटों के बीच पाकिस्तान के भीतर एक और बड़ा उबाल जन्म ले रहा है—अलग सिंधुदेश की मांग। पिछले कुछ महीनों से यह मुद्दा गरम है, लेकिन सिंध संस्कृति दिवस पर कराची में जो हुआ, उसने पूरे देश को चौंका दिया है।
कराची की सड़कों पर ‘सिंधुदेश’ की गूंज
रविवार को सिंध संस्कृति दिवस के मौके पर कराची में आयोजित एक रैली अचानक हिंसक हो गई। अलग सिंधुदेश की मांग उठाने वाले समूह जिये सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब अधिकारियों ने रैली का निर्धारित मार्ग बदलने की कोशिश की, तो भीड़ भड़क उठी। देखते ही देखते शांतिपूर्ण जुलूस पत्थरबाजी और भगदड़ में बदल गया। कराची पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 45 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का दावा है कि उग्र भीड़ की ओर से हुए पथराव में 5 पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
सिंध संस्कृति दिवस—और बढ़ती अलगाव की आवाज़
2009 से हर साल दिसंबर के पहले रविवार को मनाए जाने वाला सिंध संस्कृति दिवस आमतौर पर सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक रहा है। पर इस बार माहौल पूरी तरह अलग था।
सिंधी समूहों ने इस मंच का इस्तेमाल एक बार फिर “अपनी मातृभूमि” की मांग के लिए किया। लंबे समय से पाकिस्तान के भीतर सिंध के अलग देश बनने की आवाज़ें उठती रही हैं, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता ने इस आंदोलन को नई हवा दे दी है।
अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी ने बढ़ाया तनाव
कुछ सप्ताह पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान—“सिंध एक दिन भारत का हिस्सा हो सकता है”—ने पाकिस्तान की राजनीति में और हलचल मचा दी थी। हालांकि इस बयान की निंदा की गई, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सिंध में पहले से simmer हो रहा असंतोष और उभरकर सामने आ गया है।
न्यायपालिका संकट+सिंध आंदोलन= देश की छवि पर दोहरा प्रहार
पाकिस्तान पहले ही न्यायपालिका और सत्ता संघर्ष के कारण दुनिया भर में आलोचना झेल रहा है। इमरान खान मामले और मुनीर विवाद ने देश की राजनीतिक साख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सिंध में उभरती अलगाववादी भावना ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
विश्लेषकों का कहना है कि एक ही समय में तीन बड़े संकट—न्यायपालिका विवाद, इमरान पर कार्रवाई और सिंधुदेश आंदोलन—पाकिस्तान की स्थिरता पर अभूतपूर्व दबाव डाल रहे हैं।
फिलहाल कराची में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर कठोर धाराओं में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लेकिन सवाल बड़ा है—क्या सरकार राजनीतिक संकटों से जूझते हुए इस उभरते अलगाववादी आंदोलन को शांत कर पाएगी?
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