राजस्थान में रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की नई अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें इस साल गेहूं और सरसों को पहले की तरह प्रमुख फसलों के रूप में शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि मौसम आधारित फसल बीमा के तहत आलू, बैंगन, नींबू और आम जैसी बागवानी फसलें भी कवरेज में जोड़ी गई हैं जिसे किसान समुदाय खास तौर पर सकारात्मक कदम मान रहा है। कृषि विभाग ने साफ कहा है कि बीमा करवाने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है। विभाग को उम्मीद है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पंजीकरण की रफ्तार और तेज रहेगी, क्योंकि लगातार बदलते मौसम ने किसानों को जोखिम का अहसास पहले से कहीं ज्यादा करा दिया है।

कम प्रीमियम में अधिक सुरक्षा मिलेगी

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक प्रभुदयाल शर्मा बताते हैं कि इस बार भी प्रीमियम दरों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई। गाँवों में इसकी काफी चर्चा भी हो रही है कि इतनी बड़ी बीमित राशि पर इतना कम प्रीमियम शायद ही कोई और योजना देती हो।
  • गेहूं: बीमित राशि — ₹96,172/हेक्टेयर जबकि किसान प्रीमियम ₹1,443/हेक्टेयर है।
  • सरसों: बीमित राशि — ₹1,21,864/हेक्टेयर जबकि इसका प्रीमियम ₹1,828/हेक्टेयर है।
सरकारी सूत्रों का मानना है कि सरसों की पैदावार में पिछले तीन सालों में आए उतार-चढ़ाव के बाद किसान अब बीमा को लेकर पहले से अधिक सतर्क हो गए हैं। यही कारण है कि कम प्रीमियम वाली योजनाएँ तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।

AIC को जिम्मेदारी, KCC वाले किसानों का बीमा स्वतः

धौलपुर जिले में बीमा कार्यान्वयन की जिम्मेदारी इस बार एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (AIC) को सौंपी गई है। स्थानीय कृषि अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में दावा निस्तारण को लेकर AIC की कार्यप्रणाली बेहतर रही है, इसलिए किसानों में भरोसा भी बढ़ा है। KCC वाले किसानों का बीमा बैंक अपने स्तर पर कर देता है, इसलिए वे बिना अतिरिक्त प्रक्रिया के कवर हो जाते हैं। जो किसान योजना में शामिल नहीं होना चाहते, उन्हें 24 दिसंबर 2025 तक बैंक में घोषणा पत्र देना होगा।

बुवाई में बदलाव? किसान 29 दिसंबर तक सूचना दे सकेंगे

राजस्थान में इस बार देर से बारिश होने की वजह से कई किसानों ने बुवाई के समय या पैटर्न में बदलाव किया है। कृषि विभाग इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को 29 दिसंबर 2025 तक बुवाई परिवर्तन की सूचना देने की अनुमति दे रहा है। कई गैर-KCC किसान अभी भी बीमा प्रक्रिया को लेकर झिझक महसूस करते हैं, लेकिन विभाग का दावा है कि राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल और बैंक शाखाओं में इस बार सहायता कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि किसी किसान को लाइन में न लगना पड़े।

72 घंटे में सूचना दें, 14 दिन तक सुरक्षा कवच

कटाई के बाद खेत में सुखाई जा रही फसल को चक्रवात, ओलावृष्टि, बिजली गिरने या अचानक बारिश से नुकसान होता है, तो किसान 14 दिनों के भीतर दावा कर सकते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात— घटना की जानकारी 72 घंटों के भीतर देना अनिवार्य है। किसान अक्सर इसी वजह से दावे से चूक जाते हैं। इसलिए विभाग इस बार गांव स्तर पर भी जागरूकता अभियान चला रहा है। सूचना देने के तरीके बेहद सरल रखे गए हैं—हेल्पलाइन 14447, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप, बैंक, कृषि अधिकारी या कृषि रक्षक पोर्टल। अगर किसी कारण बुवाई ही प्रभावित हो जाए, तो योजना के तहत 25% मुआवजा दिया जाएगा—कई किसानों के लिए यह शुरुआती नुकसान में बड़ी राहत साबित होती है।

मुआवजा कैसे तय होगा?—CCE आधारित वैज्ञानिक व्यवस्था

सूखे से लेकर बाढ़ और कीट-रोग तक, किसी भी प्राकृतिक आपदा में उपज का मूल्यांकन पटवार मंडल स्तर पर किया जाएगा। इसके बाद अजमेर मंडल और आर्थिक-सांख्यिकी विभाग के CCE (फसल कटाई प्रयोग) के औसत आंकड़ों के आधार पर निस्तारण होगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान जैसे बड़े भूगोल में CCE प्रणाली ने ही बीमा को पारदर्शी और विश्वासयोग्य बनाया है।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

कृषि विभाग के अधिकारी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण रबी सीजन लगातार अप्रत्याशित होता जा रहा है। इसी वजह से विभाग किसानों को बार-बार याद दिला रहा है कि अंतिम तिथि से पहले बीमा कराना ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। स्थानीय किसान बताते हैं कि पिछले दो सीज़नों में मौसम के कारण बड़े नुकसान झेलने के बाद अब अधिकांश परिवार पहले ही दिन बीमा प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।