- 1 जनवरी 2026 से शुरू होगी एरियर की गिनती, भले ही भुगतान में हो जाए थोड़ी देरी
- फिटमेंट फैक्टर के नए फॉर्मूले से बेसिक सैलरी में हो सकता है दोगुना तक इजाफा
- जूनियर से लेकर सीनियर अधिकारियों तक, हर लेवल पर करोड़ों कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत
8th Pay Commission: नया साल शुरू होते ही देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के घरों में एक अलग तरह की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। दफ्तरों के लंच ब्रेक से लेकर घर की चाय की मेजों तक बस एक ही चर्चा है - 8वां वेतन आयोग। आखिर सैलरी कितनी बढ़ेगी? किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा? और सबसे जरूरी सवाल कि पैसा कब से मिलना शुरू होगा?
भले ही सरकार की ओर से अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी हो लेकिन हवाओं में इसकी खुशबू साफ़ महसूस की जा रही है। 7वें वेतन आयोग का वक्त अब ढलान पर है और 31 दिसंबर 2025 इसकी आखिरी तारीख मानी जा रही है। इसका सीधा सा मतलब है कि 1 जनवरी 2026 से नए वेतन आयोग की व्यवस्था कागजों पर सक्रिय हो जाएगी। भले ही आपको बढ़ी हुई सैलरी मिलने में थोड़ा इंतजार करना पड़े, लेकिन अच्छी खबर यह है कि लाभ की गिनती नए साल के पहले दिन से ही शुरू हो जाएगी।
एरियर का गणित और पुरानी यादें
मध्यम वर्गीय परिवार के लिए 'एरियर' शब्द किसी बोनस से कम नहीं होता। आपको याद होगा कि पिछले वेतन आयोगों में भी ऐसा ही हुआ था - सिफारिशें देर से आईं लेकिन पैसा पुरानी तारीख से मिला। इस बार भी यही होने जा रहा है।
अगर सरकार 2026 के अंत या 2027 में भी नई सैलरी लागू करती है, तो आपको 1 जनवरी 2026 से लेकर उस दिन तक का पूरा बकाया यानी एरियर एकमुश्त मिलेगा। यह रकम इतनी मोटी हो सकती है कि किसी का घर बन जाए तो किसी की गाड़ी का सपना पूरा हो जाए।
जानकारों की मानें तो कई कर्मचारियों के खाते में एक से दो लाख रुपये तक का एरियर सिर्फ बकाया के रूप में आ सकता है।
फिटमेंट फैक्टर: वो चाबी जिससे खुलेगा किस्मत का ताला
आम आदमी की भाषा में समझें तो फिटमेंट फैक्टर ही वो जादू की छड़ी है जो तय करती है कि आपकी बेसिक सैलरी कितनी ऊपर जाएगी। 7वें वेतन आयोग के समय यह 2.57 था। इस बार चर्चाओं का बाजार गर्म है कि 8वें वेतन आयोग में इसे 2.15 के आसपास रखा जा सकता है।
अब आप सोचेंगे कि यह पिछली बार से कम क्यों है? दरअसल, वेतन का आधार अब काफी बड़ा हो चुका है, इसलिए छोटे से दिखने वाले इस गुणांक का असर आपकी सैलरी पर बहुत बड़ा पड़ता है।
सरकारी मुलाजिमों को 18 अलग-अलग लेवल में बांटा गया है। लेवल 1 यानी हमारे वो साथी जो सबसे शुरुआती पायदान पर हैं, उनकी बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से छलांग लगाकर सीधे 38,700 रुपये के आसपास पहुंच सकती है।
यानी लगभग दोगुनी बढ़ोत्तरी। वहीं लेवल 5 के कर्मचारियों की सैलरी 29,200 रुपये से बढ़कर 62,000 रुपये के पार जा सकती है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लाखों परिवारों की उम्मीदें हैं जो महंगाई के दौर में राहत की सांस लेना चाहते हैं।
किसे मिलेगा सबसे बड़ा जैकपॉट?
अगर हम रुपयों की बात करें, तो टॉप लेवल के अधिकारियों यानी लेवल 13 से 18 वालों की चांदी होने वाली है। लेवल 15 के बड़े साहबों की सैलरी में 2 लाख रुपये तक का सीधा इजाफा देखने को मिल सकता है। वहीं लेवल 18 पर बैठे देश के सबसे सीनियर अधिकारियों की बेसिक सैलरी 2.50 लाख से बढ़कर सवा पांच लाख रुपये के ऊपर निकल सकती है।
लेकिन इस पूरे मामले का एक भावुक पहलू यह भी है कि छोटे स्तर के कर्मचारियों के लिए यह बढ़ोत्तरी जीवन बदलने वाली साबित होगी। उनके लिए 20 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी भी बच्चों की बेहतर शिक्षा और अच्छे रहन-सहन का द्वार खोलती है।
फिलहाल गेंद सरकार के पाले में है। कर्मचारी संगठनों की मांगें और सरकार की वित्तीय सेहत के बीच का तालमेल ही तय करेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा। पर इतना तो तय है कि 1 जनवरी 2026 की तारीख भारतीय प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ी लकीर खींचने जा रही है। तब तक के लिए उम्मीदों का दौर जारी है।