Delhi Air Pollution: स्मॉग और ठंड की दोहरी मार, राजधानी की हवा पहुंची खतरनाक स्तर के करीब
Delhi Air Pollution: राजधानी दिल्ली की हवा ने रविवार को फिर से चिंता बढ़ा दी। दिन चढ़ने के साथ स्मॉग की परत और गहरी होती चली गई और रात होते-होते हालात खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए। सड़कों पर निकलने वाले लोग आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत करते दिखे जबकि सुबह भी राहत का कोई संकेत नहीं मिला।
रात में हालात बिगड़े, सुबह भी राहत नहीं
रात करीब 11 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स 410 तक पहुंच गया, जो सीधे गंभीर श्रेणी में आता है। देर रात आंकड़ों में मामूली गिरावट जरूर दर्ज हुई लेकिन हालात बदले नहीं। रविवार सुबह करीब साढ़े छह बजे भी AQI 396 रिकॉर्ड किया गया जो यह साफ करता है कि हवा अब भी सेहत के लिए खतरनाक बनी हुई थी।
इन इलाकों में हवा सबसे ज्यादा खराब
राजधानी के कई हिस्सों में स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक रही। चांदनी चौक, वजीरपुर, रोहिणी, जहांगीरपुरी, आनंद विहार और मुंडका जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार सीवियर कैटेगरी में बना रहा। सुबह के समय इन इलाकों में दृश्यता बेहद कम थी और कुछ मिनट बाहर रुकना भी लोगों को भारी पड़ता महसूस हुआ।
कोहरा और ठंड ने बढ़ाई मुश्किल
हवा की खराब स्थिति के साथ मौसम ने भी परेशानी बढ़ा दी। घने से लेकर बेहद घने कोहरे के चलते दृश्यता और कम हो गई। हालात को देखते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ के कई इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। इसका असर सड़क, रेल और हवाई यातायात पर पड़ने की आशंका जताई गई।
तापमान भी लोगों की बेचैनी बढ़ाने वाला रहा। दिन का अधिकतम तापमान करीब 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जबकि न्यूनतम तापमान गिरकर करीब 8 डिग्री तक पहुंच गया। ठंड, कोहरा और स्मॉग की तिहरी मार ने पूरे दिन शहर को धुंध में डुबोए रखा।
मौसम की चाल बनी बड़ी वजह
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार प्रदूषण के पीछे मौसम की स्थिति अहम कारण बनी है। हवा की रफ्तार बेहद कम रही और तापमान में उलटफेर की स्थिति बनी रही जिससे प्रदूषक कण ऊपर फैलने के बजाय जमीन के पास ही फंसे रहे। नतीजा यह हुआ कि सांस लेने वाली हवा और ज्यादा जहरीली हो गई।
सर्दियां जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हैं, दिल्ली एक बार फिर उसी पुराने चक्र में फंसती दिख रही है जहां हर साल ठंड के साथ हवा खराब होती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह दौर सबसे ज्यादा सतर्क रहने का माना जा रहा है।
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