खेती किसानी। आजकल तो हर तरफ रासायनिक खाद की बातें चल रही हैं लेकिन क्या पता था कि पुराने जमाने की तरह घर पर ही गोबर, पत्तियों और किचन के कचरे से ऐसी खाद बन सकती है जो मिट्टी को जवान रखे और फसल को ताकत दे? जी हां किसान भाइयों हाल ही में कृषि विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भारत में जैविक खेती का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की 'प्राकृतिक खेती' योजना के तहत लाखों किसान रासायनिक खाद छोड़कर पारंपरिक तरीकों पर लौट रहे हैं और पैदावार में 20-30% तक का फायदा देख रहे हैं। चलिए आज हम बताते हैं वो पुराने राज़ जो आज भी काम कर रहे हैं ओर कैसे आप घर पर ही लीफ मोल्ड जैसी ताकतवर प्राकृतिक खाद बना सकते है।

पुराने समय में कम पैदावार, लेकिन मिट्टी हमेशा हरी-भरी!

आप सभी को याद है ना रासायनिक खाद आने से पहले हमारे दादा-परदादा गोबर की खाद, हरी फसलों को मिट्टी में मिलाकर और मवेशियों के साथ खेत चलाते थे। उस वक्त फसल थोड़ी कम होती थी – करीब 30-50% आज से कम – लेकिन मिट्टी कभी थकती नहीं थी। बारिश का पानी इकट्ठा करके सिंचाई, फसलें घुमाकर बोना, और प्राकृतिक कीट नियंत्रण... सब कुछ प्रकृति के साथ तालमेल में रहकर किया जाता था। आज की लेटेस्ट स्टडीज में पंजाब और महाराष्ट्र के किसान बता रहे हैं कि जैविक तरीके से मिट्टी की सेहत 5 साल में दोगुनी हो जाती है और पानी की बचत भी 40% तक!

घर पर बनने वाली जैविक खादें कौन कौन सी है?

किसान भाइयों अब बात करते हैं उन खादों की जो आप खुद बना सकते हो। कोई महंगी दुकान नहीं बल्कि घर का सामान इस्तेमाल करके - गोबर की खाद: गाय-भैंस का गोबर इकट्ठा करो ओर उसमें पानी मिलाकर 2-3 महीने सड़ने दो। नाइट्रोजन से भरपूर एक बेहतरीन खाद बनकर तैयार होगा और आपकी फसलों के लिए बहुत लाभकारी होगा। कंपोस्ट: किचन का छिलका, सब्जी का कचरा, पत्ते आदि सब एक गड्ढे में लेयर बनाकर डाल दो ओर गड्ढे में नमी बनाकर रखो। 3 से 6 महीने में आपका कंपोस्ट खाद बनकर तैयार हो जाएगा। वर्मी कंपोस्ट: लाल कीड़े डालो कचरे में, वो खा-पीकर सुपर खाद बना देंगे। इसको बनाना भी काफी आसान है ओर खेती के लिए अमृत माना जाता है। हरी खाद: खेत में मूंग या सहजन उगाओ या फिर ढैचा की फसल उगाओ ओर फिर जब बड़ी हो जाए तो काटकर मिट्टी में मिलाओ। इससे आपके खेत में नाइट्रोजन फ्री में आपको मिलेगी जो फसल के लिए बहुत जरूरी होती है। हड्डी या मुर्गी का लिटर: पीसकर डालो, फॉस्फोरस और पोटैशियम का खजाना इसमें छुपा हुआ होता है। हाल की खबरों में उत्तर प्रदेश के किसान बता रहे हैं कि इनसे टमाटर और गेहूं की फसल 25% ज्यादा मजबूत हो रही है और कीटनाशक की जरूरत ही नहीं पड़ती।

पत्तियों से बनाओ 'लीफ मोल्ड' ओर फिर देखो जादू

किसान भाइयों सबसे आसान ट्रिक अगर बताएं तो पतझड़ की पत्तियां इसमें आपके बहुत काम आने वाली है। सूखी पत्तियां इकट्ठा करो (ओक वाली कम लो) ओर उनको छोटी छोटी काट लो तथा इनका छायादार जगह पर एक ढेर लगाओ। पानी छिड़कते रहो ओर आप देखोगे कि अगले 6 महीने से 1 साल में काली, मुलायम खाद बनकर तैयार हो जाएगी। हर 2 महीने में एक बार पत्तियों को हिलाओ ओर अगर थोड़ा गोबर उसमें मिला दोगे तो स्पीड बढ़ेगी। गमले हो या खेत, ये मिट्टी को पानी पकड़ने वाली बना देती है। बागवानी एक्सपर्ट्स की ताजा रिपोर्ट कहती है कि शहरों में बालकनी गार्डनिंग करने वाले इससे सब्जियां दोगुनी उगा रहे हैं! किसान भाइयो रासायनिक खाद से मिट्टी थक रही है, लेकिन ये पुराने तरीके इसे नई जिंदगी देते हैं। सरकार भी सब्सिडी दे रही है जैविक बीज और खाद पर। ट्राई करके देखो, फायदा खुद दिखेगा। ज्यादा जानना हो तो लोकल कृषि केंद्र जाएं! (स्रोत: कृषि मंत्रालय की 2025 रिपोर्ट और किसान यूनियन की लेटेस्ट मीटिंग्स)