अमेरिका में क्रेडिट कार्ड वालों की चांदी, ट्रंप ने ब्याज दरों पर चलाया 'हंटर', अब 10 फीसदी से ज्यादा नहीं लगेगा चार्ज
अमेरिका के आम आदमी की जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। ट्रंप ने एलान किया है कि अब क्रेडिट कार्ड कंपनियां मनमाना ब्याज वसूल कर लोगों की कमर नहीं तोड़ पाएंगी। उन्होंने ब्याज दरों की एक सीमा तय कर दी है जिसे सीधे तौर पर मिडिल क्लास अमेरिकियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा है कि अब क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरें अगले एक साल के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत ही रहेंगी। अभी तक ये कंपनियां 20 से 30 फीसदी और कई बार तो उससे भी कहीं ज्यादा ब्याज वसूल रही थीं। ट्रंप के इस फैसले के पीछे की मंशा साफ है की बाजार में लोगों की खरीदारी करने की ताकत को बढ़ाना और कर्ज के जाल में फंसे नागरिकों को बाहर निकालना।
पिछली सरकार पर बरसे ट्रंप
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस फैसले की जानकारी देते हुए ट्रंप ने जो बाइडन की पिछली सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बाइडन के कार्यकाल के दौरान अमेरिकी जनता को लूटा जा रहा था और कंपनियां बेरोकटोक भारी ब्याज वसूल रही थीं। ट्रंप ने इसे बाइडन प्रशासन की नाकामी करार देते हुए कहा कि अब 'अफोर्डेबिलिटी' यानी चीजों को किफायती बनाना उनकी प्राथमिकता है।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि अमेरिकी जनता को अब 'रिप्ड ऑफ' यानी ठगा नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पिछले कुछ सालों में ब्याज दरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया था लेकिन प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।
20 जनवरी से बदलेगी तस्वीर
दिलचस्प बात यह है कि यह नई व्यवस्था 20 जनवरी 2026 से लागू होने जा रही है। यह तारीख इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन ट्रंप के व्हाइट हाउस में दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने वाला है। ट्रंप ने खुद इस इत्तेफाक का जिक्र किया और इसे अपनी सरकार की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दांव सीधे तौर पर उन लोगों को प्रभावित करेगा जो क्रेडिट कार्ड के जरिए अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। जब ब्याज कम होगा तो लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा बचेगा जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आने की उम्मीद है।
सिर्फ कार्ड ही नहीं, घर के सपनों को भी सहारा
यह फैसला हवा में नहीं लिया गया है, बल्कि ट्रंप प्रशासन पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जिससे महंगाई का असर कम हो सके। हाल ही में अमेरिकी सरकार ने करीब 200 अरब डॉलर के मॉर्गेज बॉन्ड खरीदने का भी एलान किया था। उसका मकसद भी यही था कि घरों के लिए मिलने वाले लोन (मॉर्गेज रेट) की दरें नीचे आएं। अमेरिका में इस समय घर खरीदना आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है और ट्रंप सरकार इसी धारणा को बदलने की कोशिश में जुटी है।
देखा जाए तो ट्रंप अपनी पुरानी छवि के अनुरूप ही बड़े और चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं। क्रेडिट कार्ड के ब्याज पर कैप लगाना एक ऐसा कदम है जो सीधा जनता के बटुए से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर इस बदलाव को कैसे स्वीकार करता है और आने वाले एक साल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ता है।
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