- बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पार किया बड़ा मील का पत्थर
- पालघर में 1.5 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा
- अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअली किया टनल ब्रेकथ्रू
- 15 अगस्त 2027 तक पहली बुलेट ट्रेन की उम्मीद
Bullet Train Project: महाराष्ट्र के पालघर जिले में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (Bullet Train Project) ने एक अहम तकनीकी पड़ाव पार कर लिया है। शुक्रवार को 1.5 किमी लंबी सुरंग (tunnel) का निर्माण कार्य पूरा हुआ। इस ऐतिहासिक पल की निगरानी स्वयं रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली स्थित रेल भवन से वर्चुअली की। जैसे ही मशीन ने पहाड़ का अंतिम हिस्सा भेदा वैसे ही सभागार में ‘भारत माता की जय’ के नारे गूँज उठे।
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पालघर में 1.5 किमी बुलेट ट्रेन टनल पूरी होने पर खुश श्रमिक[/caption]
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में दूसरी बड़ी सफलता
यह टनल पालघर जिले की सबसे लंबी टनलों में से एक है और विरार तथा बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है। इससे पहले सितंबर 2025 में महाराष्ट्र की पहली 5 किमी लंबी भूमिगत टनल ठाणे और बीकेसी (BKC) के बीच पूरी हुई थी। इन दोनों निर्माणों से संकेत मिलता है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट अब गति पकड़ रहा है।
पर्यावरणीय संतुलन का मॉडल बनेगा प्रोजेक्ट
रेलवे मंत्री वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन से राजमार्गों की तुलना में लगभग 95% कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन होगा, जो इसे पर्यावरणीय दृष्टि से क्रांतिकारी कदम बनाता है। उन्होंने कहा कि कई देशों ने ऐसे प्रोजेक्ट पर्यावरण कारणों से शुरू किए थे और भारत भी अब इस दिशा में मजबूत संदेश दे रहा है।
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1.5 किमी बुलेट ट्रेन टनल के अंदर का नजारा[/caption]
उन्होंने दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा, “विकास (growth) और पर्यावरण (environment) दोनों में संतुलन संभव है। वहाँ ऐसे प्रोजेक्ट से अर्थव्यवस्था को बढ़ावा और शहरों में ट्रैफिक कम हुआ।”
अगस्त 2027 में पहली बुलेट ट्रेन की उम्मीद
वैष्णव ने इशारा किया कि देश को 15 अगस्त 2027 तक पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। 508 किमी लंबा यह कॉरिडोर (corridor) मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगा जिससे दोनों शहरों के बीच की यात्रा मात्र दो घंटे में पूरी हो सकेगी। इस मार्ग में वडोदरा, सूरत, भरूच और ठाणे जैसे अहम शहर शामिल हैं।
राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार कुल 508 में से 465 किमी हिस्सा एलिवेटेड वायडक्ट (elevated viaduct) पर बनेगा, जिसमें से 326 किमी का काम पूरा हो चुका है।
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1.5 किमी बुलेट ट्रेन टनल का बहरी गेट जहाँ से एंट्री होती है[/caption]
तकनीक और निर्माण के नए मानक
वैष्णव ने बताया कि 40 मीटर से अधिक लंबाई वाले हिस्सों में स्टील ब्रिज का उपयोग किया जा रहा है, क्योंकि ये हल्के होने के साथ-साथ मजबूत भी होते हैं। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री लगातार गुणवत्ता (quality) और टेक्नोलॉजी (technology) के नए मानक स्थापित करने पर बल देते रहे हैं। यह प्रोजेक्ट उसी दृष्टिकोण का उदाहरण है।”
मोदी ने भी खुद किया था निरीक्षण
नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में इस प्रोजेक्ट की विस्तृत समीक्षा की थी। उन्होंने सूरत स्टेशन का निरीक्षण किया था, जो शहर की हीरे की पहचान से प्रेरित डिजाइन लिए हुए है। 26.3 मीटर ऊँचा यह स्टेशन तीन स्तरों पर बना है जिसमे ग्राउंड फ्लोर पर सुरक्षा और पार्किंग, बीच में कंकोर्स (concourse) स्तर पर लाउंज और टिकटिंग तथा ऊपर प्लेटफॉर्म स्तर पर यात्री बोर्डिंग शामिल है।
भारत की यह बुलेट ट्रेन परियोजना केवल तेज़ यात्रा का सपना नहीं बल्कि आधुनिकता, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन की कहानी भी है। पालघर की यह टनल उस कहानी का नया अध्याय बन गई है।