दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! डोमेन रजिस्ट्रेशन में अनिवार्य होगा e-KYC, ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम

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World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor
Dec 26, 2025 • 6:21 PM
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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! डोमेन रजिस्ट्रेशन में अनिवार्य होगा e-KYC, ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
िस्ट्रेशन में अनिवार्य होगा e-KYC, ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! डोमेन रजिस्ट्रेशन में अनिवार्य होगा e-KYC, ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम
  • डोमेन रजिस्ट्रेशन में अनिवार्य होगा e-KYC सत्यापन
  • 72 घंटे में कोर्ट को देनी होगी पूरी जानकारी
  • 1,100 फर्जी डोमेन में एक का भी बचाव नहीं
  • केंद्र से NIXI जैसा एक समान फ्रेमवर्क बनाने को कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने डोमेन नाम रजिस्ट्रेशन के समय अनिवार्य e-KYC वेरिफिकेशन का आदेश दिया है।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने 248 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि पहचान की ढीली-ढाली जांच की वजह से फिशिंग वेबसाइटों और बड़े पैमाने पर उपभोक्ता ठगी को बढ़ावा मिला है।

यह निर्णय डाबर इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर मुकदमों के एक समूह पर आया है जिसमें कंपनी ने अपने नाम का दुरुपयोग कर बनाई गई फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ शिकायत की थी।

गुमनामी बन गई थी धोखाधड़ी का हथियार

अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि डोमेन रजिस्ट्रेशन में गुमनामी की सुविधा ने मशहूर ब्रांडों के नाम का गलत इस्तेमाल करके लोगों को ठगने का रास्ता खोल दिया है।

फर्जी फ्रेंचाइजी, डिस्ट्रीब्यूटरशिप और निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने वाले अपराधी इसी खामी का फायदा उठा रहे थे। यह भी पढ़ें: आज से ट्रेन टिकट हुआ महंगा! 500 KM के सफर पर देने होंगे ₹10 एक्स्ट्रा, जानें नया रेट

जस्टिस सिंह ने प्राइवेसी बाय डिफॉल्ट की प्रथा को खारिज करते हुए कहा कि बिना सत्यापित क्रेडेंशियल के रजिस्ट्रेंट की जानकारी छुपाना वित्तीय धोखाधड़ी को बढ़ावा देने वाला मुख्य कारक बन गया है।

अदालत ने टिप्पणी की कि रजिस्ट्रेशन के समय गुमनामी की पेशकश से ब्रांड मालिकों, बैंकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए समय पर अपराधियों का पता लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

72 घंटे में देनी होगी पूरी जानकारी

कोर्ट ने आदेश दिया है कि भारत में सेवाएं देने वाले सभी डोमेन नाम रजिस्ट्रार्स (DNR) को रजिस्ट्रेशन के समय रजिस्ट्रेंट की जानकारी का अनिवार्य सत्यापन करना होगा।

इसके बाद समय-समय पर री-वेरिफिकेशन भी जरूरी होगा। यह सब CERT-In के 28 अप्रैल 2022 के सर्कुलर में बताए गए KYC नियमों के मुताबिक करना होगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई रजिस्ट्रेंट वेरिफिकेशन पूरा करने के बाद खासतौर पर प्राइवेसी प्रोटेक्शन का विकल्प नहीं चुनता तब तक व्यक्तिगत जानकारी को छुपाया नहीं जा सकता। यह भी पढ़ें: हरियाणा के 1.20 लाख Contract कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! CM नायब सैनी ने लॉन्च किया Job Security Portal

एक अहम निर्देश यह भी दिया गया है कि कोर्ट या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध पर रजिस्ट्रार्स को 72 घंटे के भीतर सत्यापित जानकारी देनी होगी।

इसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और भुगतान की जानकारी शामिल होगी।

NIXI के साथ साझा करनी होगी जानकारी

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सत्यापित रजिस्ट्रेशन डेटा को NIXI (नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया) के साथ साझा करना होगा।

यह उन डोमेन के संबंध में होगा जो NIXI द्वारा प्रशासित किए जाते हैं। हर महीने अपडेट जानकारी भी देनी होगी।

NIXI भारत में इंटरनेट बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और .in डोमेन को मैनेज करता है।

नहीं माने तो खो सकते हैं सेफ हार्बर सुरक्षा

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेतावनी दी है कि KYC और जानकारी साझा करने की जिम्मेदारियों का पालन न करने पर रजिस्ट्रार्स को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

उन्हें इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खोनी पड़ सकती है।

यही नहीं, सेक्शन 69A के तहत उनकी सेवाओं को ब्लॉक भी किया जा सकता है।

सेफ हार्बर प्रावधान वह कानूनी सुरक्षा है जो प्लेटफॉर्म्स को उनके यूजर्स द्वारा की गई गलतियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराती। लेकिन अब यह सुरक्षा तभी मिलेगी जब रजिस्ट्रार अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।

1,100 से ज्यादा फर्जी डोमेन, एक भी बचाव नहीं

जस्टिस सिंह ने अपने फैसले में एक चौंकाने वाली बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1,100 से अधिक उल्लंघन करने वाले डोमेन नामों में से लगभग किसी का भी कोई वास्तविक रजिस्ट्रेंट द्वारा बचाव नहीं किया गया।

अदालत ने कहा, "यह खुद दिखाता है कि इन फर्जी डोमेन नामों का प्रसार केवल गैरकानूनी और अवैध उद्देश्यों के लिए हो रहा है।"

जज ने जोर देकर कहा :

इसलिए उपभोक्ताओं के विश्वास और व्यवसायों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्देश पारित करना जरूरी है। सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा उपायों की विफलता के कारण किसी भी पक्ष को धोखाधड़ी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

केंद्र से एक समान KYC फ्रेमवर्क बनाने को कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह भारत में काम करने वाले सभी डोमेन नाम रजिस्ट्रार्स के लिए एक समान e-KYC फ्रेमवर्क तलाशे। यह भी पढ़ें: छोटी बचत योजनाओं पर नया फैसला जल्द: रेपो रेट घटने के बाद भी ब्याज दरें बदलेंगी या रहेंगी स्थिर?

यह NIXI द्वारा अपनाई जाने वाली प्रणाली के समान होना चाहिए, लेकिन डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के अनुपालन को भी सुनिश्चित करना होगा।

अदालत ने निर्देश दिया:

सरकार भारत में सेवाएं देने वाले सभी DNR और रजिस्ट्री ऑपरेटर्स के साथ स्टेकहोल्डर परामर्श करेगी। डोमेन नाम रजिस्ट्रेशन के उद्देश्य से सभी DNR द्वारा NIXI जैसी प्रणाली लागू करने की संभावना तलाशी जाएगी।

यह कदम पूरे देश में एक मानकीकृत और सुरक्षित डोमेन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में है।

ब्रांड्स को मिलेगा संरक्षण

यह फैसला खासतौर पर उन कंपनियों के लिए राहत भरा है जिनके नाम का दुरुपयोग करके फर्जी वेबसाइटें बनाई जा रही थीं।

डाबर जैसी नामी कंपनियां लंबे समय से इस समस्या से जूझ रही थीं। उनके नाम पर बनी फर्जी वेबसाइटें लोगों को फ्रेंचाइजी या डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर पैसे ठगती थीं।

अब जब हर डोमेन रजिस्ट्रेशन में पूरी KYC जरूरी होगी तो ऐसी धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा।

ब्रांड मालिकों के लिए अपनी पहचान की रक्षा करना और अपराधियों को ट्रैक करना आसान हो जाएगा।

उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा कवच

आम जनता के लिए यह फैसला एक सुरक्षा कवच की तरह है।

ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ फिशिंग वेबसाइटों का खतरा भी बढ़ गया था। लोग नकली वेबसाइटों पर ठगी का शिकार हो रहे थे।

अब जब हर वेबसाइट के पीछे की असली पहचान का पता लगाना संभव होगा तो साइबर अपराधियों के लिए मैदान संकरा हो जाएगा।

बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मिलेगी मदद

पुलिस और साइबर क्राइम सेल के लिए यह फैसला एक बड़ी मदद साबित होगा।

पहले अपराधियों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल था क्योंकि उनकी पहचान छुपी रहती थी। महीनों की जांच के बाद भी कई बार सुराग नहीं मिलता था। यह भी पढ़ें: ₹18 हजार से ₹69 हजार सैलरी! 8वें वेतन आयोग का धमाका, फिटमेंट फैक्टर 3.86 से बदलेगी किस्मत

अब 72 घंटे के भीतर पूरी जानकारी मिलने से त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

यह समय की बचत तो करेगा ही, साथ ही और लोगों को ठगे जाने से भी बचाएगा।

डिजिटल इंडिया के लिए जरूरी कदम

भारत तेजी से डिजिटल होता जा रहा है। हर दिन हजारों नई वेबसाइटें बन रही हैं और लाखों लोग ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऐसे में डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी है। यह फैसला उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।

सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम तभी सफल होगी जब लोगों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा होगा।

आगे क्या होगा?

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। उसे सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठकर एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क तैयार करना होगा।

डोमेन रजिस्ट्रार्स को अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव लाने होंगे। तकनीकी बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा।

शुरुआत में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन लंबे समय में यह पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के लिए फायदेमंद साबित होगा।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले की सराहना की है। उनका मानना है कि यह भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor

Coverage of global politics, international conflicts, and major world developments.

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