दिल्ली-एनसीआर में रविवार को रिकॉर्ड स्तर का स्मॉग, कई इलाकों में AQI 499 तक पहुंचा। घनी धुंध से विजिबिलिटी शून्य

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World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor
Dec 14, 2025 • 10:51 AM
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दिल्ली-एनसीआर में रविवार को रिकॉर्ड स्तर का स्मॉग, कई इलाकों में AQI 499 तक पहुंचा। घनी धुंध से विजिबिलिटी शून्य
 का स्मॉग, कई इलाकों में AQI 499 तक पहुंचा। घनी धुंध से विजिबिलिटी शून्य
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दिल्ली-एनसीआर में रविवार को रिकॉर्ड स्तर का स्मॉग, कई इलाकों में AQI 499 तक पहुंचा। घनी धुंध से विजिबिलिटी शून्य

दिल्ली (एनएफएल स्पाइस): दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर मौसम और प्रदूषण के दोहरे हमले के बीच फंस गया है। रविवार की सुबह राजधानी नींद से नहीं, बल्कि एक घुटन भरी चुप्पी में डूबी नजर आई। शहर पर इतनी मोटी स्मॉग की चादर लिपटी कि कई इलाकों में सड़कें, इमारतें और यहां तक कि ट्रैफिक लाइट्स तक मानो हवा में खो गईं। लोगों ने घरों से निकलते ही महसूस किया कि यह महज धुंध नहीं, बल्कि एक खतरनाक मिश्रण है जिसने सांस लेना तक मुश्किल कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली का औसत AQI सुबह 7 बजे 461 पहुंच गया—एक ऐसा स्तर, जो सीधे-सीधे ‘जीवन के लिए बेहद हानिकारक’ श्रेणी में आता है। खास बात यह है कि यह उछाल एकदम अचानक नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई दिनों से बढ़ते प्रदूषण का यह चरम रूप है। शनिवार को AQI 431 था और अब उससे भी खराब स्तर ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

दिल्ली के सभी 40 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में रही। रोहिणी में AQI 499 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि कुछ इलाकों में प्रदूषण अब लगभग सिस्टम के मापने की सीमा को छू रहा है। बवाना, विवेक विहार, वजीरपुर और नरेला भी इसी दौड़ में पीछे नहीं रहे। कुल मिलाकर पूरे शहर ने ऐसी हवा में सुबह की शुरुआत की, जिसमें आंखों में जलन और गले में खराश अपने-आप पैदा हो जाए।

आईटीओ, पंजाबी बाग और चांदनी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में सुबह की आवाजाही लगभग ठहरी हुई दिखी। जहां आमतौर पर ड्यूटी पर निकलने वालों की तेज रफ्तार दिखती है, वहां आज लोग कदम-कदम कर आगे बढ़ते नजर आए। हवा में घुली नमी और प्रदूषक कणों ने विजिबिलिटी को इतना कम कर दिया कि कई जगह वाहन रुक-रुककर चलने लगे। दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए यह मौसम चुभन, चिंता और बेबसी का मिला-जुला अनुभव लेकर आया।

संकट सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। गाजियाबाद और नोएडा में AQI 460 और 470 दर्ज हुआ, जबकि गुरुग्राम ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहा। फरीदाबाद में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर जरूर रही, लेकिन 220 का सूचकांक किसी भी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पूरे क्षेत्र में हवा की स्थिति लोगों के स्वास्थ्य को चुनौती देने वाली साबित हो रही है।

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुबह-सुबह बदलते मौसम ने उड़ान संचालन को तनावपूर्ण बना दिया। भले ही उड़ानें चलती रहीं, लेकिन सभी पायलटों को अलर्ट मोड पर काम करने के आदेश दिए गए। मौसम विभाग पहले ही अनुमान लगा चुका था कि विजिबिलिटी 100 मीटर तक गिर सकती है—और यही हुआ भी। बाद में कुछ सुधार जरूर दिखा, लेकिन प्रदूषण की घनी परत दिन भर आसमान पर चिपकी रही।

विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की यह स्थिति सिर्फ मौसम की वजह से नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण तंत्र के लगातार कमजोर होने का नतीजा भी है। हवा स्थिर है, नमी ज्यादा है और प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो पा रहा—ऐसे में स्मॉग का खतरा और गहरा होता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह मौसम बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा-हृदय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक है।

दिल्ली-एनसीआर में लोग आज एक ऐसे माहौल में जी रहे हैं जहां हवा दिखाई तो देती है, लेकिन सांस लेने के लिए सुरक्षित नहीं। याद दिलाने वाली यह सुबह एक सवाल खड़ा करती है — आखिर कब तक राजधानी को हर सर्दी इस अदृश्य ज़हर के साथ जीना पड़ेगा?

World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor

Coverage of global politics, international conflicts, and major world developments.

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