हरियाणा भावांतर भरपाई योजना: शहद के लिए ₹120 का भाव तय, जानें मधुमक्खी पालकों को कैसे मिलेगा लाभ

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Vews Ai Verified Media or Organization • 27 Feb, 2026 Editor
Jan 8, 2026 • 10:28 PM
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हरियाणा भावांतर भरपाई योजना: शहद के लिए ₹120 का भाव तय, जानें मधुमक्खी पालकों को कैसे मिलेगा लाभ
₹120 का भाव तय, जानें मधुमक्खी पालकों को कैसे मिलेगा लाभ
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हरियाणा भावांतर भरपाई योजना: शहद के लिए ₹120 का भाव तय, जानें मधुमक्खी पालकों को कैसे मिलेगा लाभ
  • हरियाणा सरकार ने शहद उत्पादकों के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए तय किया सुरक्षा कवच।
  • भावांतर भरपाई योजना के दायरे में आया शहद, अब मार्केट की उठापटक से नहीं घबराएंगे किसान।
  • मधुक्रांति पोर्टल पर 1 जनवरी से शुरू हुआ पंजीकरण, 120 रुपये प्रति किलो का भाव सुनिश्चित।
  • परिवार पहचान पत्र के जरिए सीधा खाते में पहुंचेगा लाभ, बिचौलियों का खेल होगा खत्म।
खेती-किसानी सिर्फ अनाज उगाने तक सीमित नहीं रह गई है और हरियाणा के किसान इस बात को बखूबी समझते हैं। लेकिन अक्सर मेहनत की राह में रोड़ा बनता है बाजार का उतार-चढ़ाव। कभी दाम आसमान पर तो कभी इतने कम कि लागत निकालना भी दूभर हो जाए। इसी अनिश्चितता को खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बड़ा दांव खेला है। अब प्रदेश के मधुमक्खी पालकों को बाजार की मंदी से बचाने के लिए शहद को 'भावांतर भरपाई योजना' के सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने इसकी घोषणा करते हुए साफ कर दिया कि अब शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर बाजार में कीमतें गिरती हैं, तो सरकार उस अंतर की भरपाई करेगी। यह फैसला उन हजारों युवाओं और किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है जो पारंपरिक खेती छोड़ या उसके साथ-साथ मधुमक्खी पालन के जरिए अपनी किस्मत संवार रहे हैं।

सिर्फ शहद ही नहीं, फसल भी लहलहाएगी

मंत्री श्याम सिंह राणा का कहना है कि यह सिर्फ मुनाफे की बात नहीं है। मधुमक्खी पालन एक ऐसा जरिया है जो परागण (Pollination) के जरिए खेतों की उत्पादकता भी बढ़ाता है। यानी किसान का शहद भी बिकेगा और उसकी बाकी फसलें भी बेहतर होंगी। सरकार चाहती है कि किसान सिर्फ गेहूं-धान के चक्र में न फंसा रहे, बल्कि विविधीकरण की ओर बढ़े। शहद के लिए न्यूनतम भाव तय करना इसी दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। लेकिन लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी नियम भी तय किए गए हैं। इस योजना का फायदा उन्हीं को मिलेगा जो तय समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण कराएंगे। सरकार ने इसके लिए 1 जनवरी से 30 जून 2026 तक का समय दिया है। पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल रखा गया है ताकि किसी भी स्तर पर पारदर्शिता में कमी न आए।

कैसे और कहाँ होगा रजिस्ट्रेशन?

अगर आप भी मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, तो आपको 'मधुक्रांति पोर्टल' (madhukranti.in) या हरियाणा उद्यान विभाग के पोर्टल (hortharyana.gov.in) पर जाकर अपनी डिटेल भरनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि योजना का लाभ लेने के लिए हरियाणा की भौगोलिक सीमा के भीतर वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। इस पूरी प्रक्रिया में 'परिवार पहचान पत्र' (PPP) और बैंक अकाउंट की भूमिका सबसे अहम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि पैसा सीधे हकदार के खाते में जाए। अधिकारियों की एक टीम मौके पर जाकर सत्यापन करेगी ताकि असली मधुमक्खी पालकों को ही सरकारी मदद मिल सके।

बदलती खेती और युवाओं के लिए मौका

आज के दौर में जब खेती की जमीन कम हो रही है, मधुमक्खी पालन जैसे सहायक व्यवसाय रोजगार का बड़ा जरिया बन रहे हैं। सरकार की इस पहल से उन युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा जो तकनीकी रूप से सक्षम हैं और कुछ नया करना चाहते हैं। 120 रुपये का फिक्स भाव एक तरह की गारंटी है, जो किसान को जोखिम लेने का हौसला देती है। अगर आपको रजिस्ट्रेशन या योजना की शर्तों को लेकर कोई भी उलझन है, तो सरकार ने इसके लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2021 भी जारी किया है। कृषि मंत्री ने सभी मधुमक्खी पालकों से अपील की है कि वे देरी न करें और समय रहते पोर्टल पर अपनी जानकारी साझा करें ताकि इस 'मीठी क्रांति' का पूरा फायदा उन तक पहुंच सके।

Vews Ai Verified Media or Organization • 27 Feb, 2026 Editor

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