करनाल में BJP दफ़्तर के लिए 40 पेड़ कटे: सुप्रीम कोर्ट भड़का, हरियाणा सरकार को 3 महीने में ग्रीन ज़ोन बहाल करने का आदेश

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World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor
Dec 10, 2025 • 9:56 PM
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करनाल में BJP दफ़्तर के लिए 40 पेड़ कटे: सुप्रीम कोर्ट भड़का, हरियाणा सरकार को 3 महीने में ग्रीन ज़ोन बहाल करने का आदेश
 सुप्रीम कोर्ट भड़का, हरियाणा सरकार को 3 महीने में ग्रीन ज़ोन बहाल करने का आदेश
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करनाल में BJP दफ़्तर के लिए 40 पेड़ कटे: सुप्रीम कोर्ट भड़का, हरियाणा सरकार को 3 महीने में ग्रीन ज़ोन बहाल करने का आदेश
Haryana News: करनाल में भाजपा कार्यालय तक पहुंच बनाने के लिए बनाई गई एक्सेस रोड अब हरियाणा सरकार के लिए मुश्किल बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सड़क निर्माण के दौरान 40 बड़े पेड़ों की कटाई पर गंभीर आपत्ति जताते हुए राज्य को तीन महीने में उस जमीन को उसकी मूल हरित अवस्था में लौटाने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा—यह सिर्फ पेड़ काटने का मामला नहीं बल्कि ग्रीन ज़ोन के साथ सरासर छेड़छाड़ है।

यह मामला 1971 युद्ध के वीर चक्र विजेता और पूर्व सैनिक कर्नल (सेवानिवृत्त) दविंदर सिंह राजपूत की याचिका से शुरू हुआ, जिन्होंने जमीन आवंटन और पेड़ों की कटाई को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।

पीठ में शामिल जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन ने सुनवाई के दौरान सरकार से कई कठोर सवाल पूछे। अदालत का कहना था कि राज्य की ओर से पेश किए गए दस्तावेज यह साबित नहीं करते कि पूरा निर्णय कानून के अनुसार लिया गया।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “अवैध कटाई, हरा क्षेत्र बर्बाद”

सुनवाई में अधिवक्ता भूपेंद्र प्रताप सिंह ने दलील दी कि भाजपा कार्यालय को बेहतर पहुंच देने के लिए पेड़ों को हटाया गया और हरी जमीन से समझौता किया गया। कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि पेड़ काटने की प्रक्रिया न तो पारदर्शी थी, न ही पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप।

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि कटाई के बदले नए पेड़ लगाए जाएंगे, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पहले नुकसान हुआ है… अब सिर्फ पौधे लगाने से गलती सही नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने याद दिलाया कि 26 नवंबर को भी राज्य सरकार को चेतावनी दी गई थी कि यह पूरा काम बेहद खराब तरीके से किया गया है।

पूर्व सैनिक की आपत्ति: “जिस जमीन के लिए 36 साल पहले अतिरिक्त शुल्क दिया, उसे ही बदल दिया गया”

याचिकाकर्ता कर्नल राजपूत ने कहा कि उनके प्लॉट के साथ वाली जमीन को गलत ढंग से भाजपा को आवंटित किया गया, जबकि वह संस्थागत उपयोग के लिए निर्धारित भी नहीं थी।
उन्होंने बताया कि उन्होंने 36 साल पहले हरे क्षेत्र की ओर प्लॉट लेने के लिए 10% अतिरिक्त शुल्क दिया था, लेकिन अब उसी जमीन की प्रकृति बदल दी गई।

उनका बड़ा आरोप यह भी था कि जिस जमीन को आवंटित किया गया, वह सिर्फ नौ मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित है, जबकि नियमों के अनुसार ऐसी संस्थागत साइट कम से कम 24 मीटर चौड़ी सड़क पर होनी चाहिए।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक—क्यों बढ़ा मामला?

कर्नल राजपूत की याचिका पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बेंच ने पहली ही सुनवाई में कई संदिग्ध पहलुओं पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जमीन आवंटन के बारे में सरकार की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड विश्वसनीय और संतोषजनक नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और करनाल नगर निगम को ठीक तीन महीने का समय देते हुए उस भूमि को उसकी मूल हरित स्थिति में वापस लाने का निर्देश दिया।

अदालत ने आवंटन की वैधता पर आगे जांच से इनकार किया, यह कहते हुए कि इसे चुनौती देने में अब काफी देर हो चुकी है—लेकिन स्टेटस-को बरकरार रखने का आदेश भी दोहराया।

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी—अगर इस क्षेत्र में आगे कोई भी विकास या निर्माण हुआ, तो इसे सीधी अवमानना माना जाएगा।

World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor

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