हरियाणा सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज, विधवा-विधुर और अविवाहित पेंशन, और पद्म पुरस्कार विजेताओं के सम्मान के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। इसका मकसद योजनाओं को पारदर्शी बनाना और सही लोगों तक लाभ पहुंचाना है। अब अगर कोई प्रदेश का रहने वाला नागरिक योजनाओं का लाभ लेना चाहता है तो उसको अपना आधार कार्ड दिखाना ही होगा और बिना इसके किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा.
हरियाणा प्रदेश की सरकार की तरफ से एक बड़ा फैसला लिया गया है जिसमे कहा गया है की बिना
आधार कार्ड के किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जायेगा. प्रदेश में इलाज के लिए आर्थिक मदद वाली योजनाएं हो या फिर किसानों के लिए चलाई जा रही कोई भी स्कीम, विधवाओं, विधुरों और कुंवारों को पेंशन देने वाली स्कीम या फिर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री विजेताओं को मिलने वाली 10 हजार रुपये की मासिक सम्मान राशि, सभी में अब आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है.
क्यों कर रही है सरकार ऐसा?
सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी अनुपमा ने बताया कि आधार अनिवार्यता से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी मदद सही हकदार तक पहुंचे। अभी तक कई मामले ऐसे सामने आये है जिनमे किसी और के नाम की आर्थिक सहायता फर्जीवाड़े के चलते कुछ अन्य लोगों को मिली है लेकिन अब आगे ऐसा नहीं होगा. इस नए नियम को लागु करने के बाद सरकार की मंशा साफ है की सही व्यक्ति को सही लाभ मिलेगा ये सुनिश्चित करना अब प्रदेश में जरुरी हो गया है.
आधार नहीं है तो क्या करें?
किसी भी योजना में आवेदन के समय आधार कार्ड से पहचान की पुष्टि होगी और पहचान करके ही किसी भी व्यक्ति को कोई भी योजना का लाभ दिया जाता है. अगर आवेदन के समय आधार कार्ड नहीं है तो पहले आधार कार्ड के लिए आवेदन करना होगा और आधार आने के बाद ही योजना का लाभ दिया जायेगा. आपको बता दें की 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता या अभिभावक की सहमति जरूरी है। तब तक अन्य पहचान दस्तावेजों से भी मदद दी जा सकती है।
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