नई दिल्ली, 10 दिसंबर (आईएएनएस)। 1971 में हुए भारत–पाक युद्ध में भारत को ऐतिहासिक विजय मिली थी। इस जीत को याद करते हुए बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने शानदार एयर डिस्प्ले किया।
वायुसेना के इस एयर डिस्प्ले में सुखोई-30 एमकेआई, सी-130, डोर्नियर, एएन-32, चिनूक, एमआई-17, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और चीता विमानों ने भाग लिया। समारोह में वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में इन विमानों के प्रदर्शन के माध्यम से 1971 युद्ध की प्रमुख सैन्य कार्रवाइयों को जीवंत रूप से दोहराया गया, जिसमें टंगाइल एयरड्रॉप, मेघना नदी पार अभियान और 1971 का ढाका स्थित गवर्नमेंट हाउस पर हमला शामिल था।
इस फ्लाइंग डिस्प्ले ने भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल क्षमता, तत्परता और मिशन रेडीनेस को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। भारतीय वायु सेना ने असम के एयर फोर्स स्टेशन मोहानबाड़ी में यह आयोजन किया। 1971 भारत–पाक युद्ध में भारत की ऐतिहासिक विजय के उपलक्ष्य में यहां पूरे सम्मान और गौरव के साथ विजय दिवस मनाया।
इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस, वीरता और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी, युद्ध के दिग्गज (वेटरन्स) और बड़ी संख्या में असम के युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने राष्ट्र की रक्षा में सशस्त्र बलों की भूमिका और 1971 के युद्ध में प्राप्त निर्णायक विजय को स्मरणीय रूप में प्रस्तुत किया। इस विशेष अवसर पर आयोजित शानदार विजय दिवस में ‘1971 युद्ध के दौरान वायु संचालन’ विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन भी किया गया। इसमें वायु सेना के पूर्व सैनिकों ने युद्ध के दौरान अपने अनुभव, स्मृतियां और प्रेरक प्रसंग साझा किए, जिससे युवा पीढ़ी को देशभक्ति और सेवा की भावना से प्रेरणा मिली।
इसके अलावा, ‘ट्रायंफ फ्रॉम दी स्काई-71’ शीर्षक से एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में 1971 युद्ध काल की दुर्लभ और ऐतिहासिक अभिलेखीय तस्वीरों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में ‘स्वर्णिम विजय मशाल’ की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई, जो भारत की निर्णायक विजय का प्रतीक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस समारोह का उद्देश्य न केवल 1971 के वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि देना था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रीय गौरव, देशभक्ति और सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान की भावना को और सुदृढ़ करना भी था।
--आईएएनएस
World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026Editor
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