छोटी बचत योजनाओं पर नया फैसला जल्द: रेपो रेट घटने के बाद भी ब्याज दरें बदलेंगी या रहेंगी स्थिर?

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Vews Verified Media or Organization • 30 May, 2019 Chief Editor
Dec 26, 2025 • 8:53 AM
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छोटी बचत योजनाओं पर नया फैसला जल्द: रेपो रेट घटने के बाद भी ब्याज दरें बदलेंगी या रहेंगी स्थिर?
 रेट घटने के बाद भी ब्याज दरें बदलेंगी या रहेंगी स्थिर?
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छोटी बचत योजनाओं पर नया फैसला जल्द: रेपो रेट घटने के बाद भी ब्याज दरें बदलेंगी या रहेंगी स्थिर?
  • चौथी तिमाही की नई ब्याज दरों का ऐलान होगा
  • 7 तिमाहियों से स्थिर दरें क्या अब बदलेंगी?
  • रेपो रेट घाट कर 1.25% पर आई
  • सुकन्या, PPF, NSC से निवेशकों को सहारा
Small Savings Schemes Iinterest Rate: केंद्र सरकार छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की नई समीक्षा करने की तैयारी में है। जनवरी से मार्च 2026 वाली चौथी तिमाही के लिए दरों का ऐलान 31 दिसंबर के आसपास होने की संभावना है। इस बीच आम निवेशकों, रिटायर्ड नागरिकों और बेटियों की पढ़ाई के लिए सुकन्या में निवेश करने वाले लाखों परिवारों की नजरें इस घोषणा पर टिकी हैं।

ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद, लेकिन क्यों?

वित्तीय विशेषज्ञों की मानें, तो इस साल रेपो रेट में कुल 1.25% की कमी के बावजूद ब्याज दरें जैसी हैं वैसी ही रहने की संभावना ज्यादा है। वजह ये है कि बाजार में ब्याज दरें गिरने के बावजूद सरकार को छोटी बचत योजनाओं पर आकर्षक रिटर्न बनाए रखने की जरूरत है ताकि बचतकर्ता इन योजनाओं से जुड़े रहें। सरकार फिलहाल 12 तरह की छोटी बचत योजनाएं चलाती है जैसे डाकघर बचत खाते, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि, एनएससी, किसान विकास पत्र जैसी योजनाएं। ये योजनाएं गरीब, मध्यमवर्ग और सुरक्षित निवेश चाहने वाले लोगों की आर्थिक रीढ़ मानी जाती हैं।

सात तिमाहियों से स्थिर दरें है

बीते सात तिमाहियों से इन दरों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पीपीएफ 7.1%, एनएससी 7.7%, सुकन्या समृद्धि 8.2% और वरिष्ठ नागरिक योजना भी 8.2% पर चल रही है। आर्थिक जानकार इसे एक तरह के आर्थिक संतुलन का प्रयास बताते हैं। दरें बढ़ाने से सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है जबकि कम करने से निवेशक निराश होते हैं। ऐसे में स्थिरता एक सुरक्षित कदम माना जा रहा है।

क्या बदल सकता है?

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सरकार नए साल में आम बजट से पहले कल्याणकारी संकेत देना चाहे, तो सुकन्या या वरिष्ठ नागरिक योजना जैसी संवेदनशील योजनाओं की दरों में मामूली बढ़ोतरी संभव है। हालांकि बहुमत यही कहता है कि स्टेटस-को (यथास्थिति) जारी रहने की उम्मीद रखनी चाहिए।

कौन सी योजना में क्या ब्याज दर है अभी

देश में मौजूदा समय में जो प्रमुख बचत योजनाएं है उनमे इस समय जो ब्याज दर दी जा रही है वो काफी अच्छी है लेकिन इनमे और बढ़ौतरी सरकार अगर करती है तो लोगों को और अधिक लाभ मिलेगा। इस समय वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में 8.2 फीसदी और सुकन्या समृद्धि योजना में 8.2 फीसदी ब्याज का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF): 7.1 फीसदी सालाना ब्याज, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) में 7.7 फीसदी ब्याज और किसान विकास पत्र (KVP) में 7.5 फीसदी ब्याज का लाभ सरकार की और से दिया जा रहा है। वहीँ डाकघर की बचत योजनाओं में डाकघर मासिक आय योजना पर 7.4 फीसदी ब्याज मिल रहा है। इसमें एक साल से 5 साल की अवधी के जमा 6.9 से 7.5 फीसदी ब्याज का लाभ मिलता है। इसके साथ ही डाकघर की 5 वर्ष की आवर्ती जमा (RD) पर ग्राहकों को 6.7 फीसदी ब्याज का लाभ मिल रहा है।

रेपो रेट में कटौती का असर

इस साल RBI ने फरवरी, अप्रैल, जून और दिसंबर में कटौती करते हुए रेपो रेट को घटाकर 5.25% कर दिया। कई बैंकों ने बचत खाते और एफडी की दरें पहले ही घटा दी हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि सरकार भी बचत योजनाओं पर रेट घटाएगी, लेकिन बाजार की स्थितियों को देखते हुए अब स्थिर रखने की तरफ झुकाव ज्यादा है।

आम निवेशक क्या सोच रहे हैं

रेवाड़ी के सेवानिवृत्त बैंककर्मी राजीव शर्मा कहते हैं कि ब्याज दरों में गिरावट अगर बैंकिंग सेक्टर में होती है तो सरकार को छोटी बचत में स्थिरता बनाकर चलना चाहिए। वहीं धारूहेड़ा के रहने नरेशा शर्मा कहते हैं कि सुकन्या समृद्धि योजना उनकी बेटी की पढ़ाई के लिए आधार है और स्थिर ब्याज दरें उनके दीर्घकालिक प्लान का विश्वास बनाए रखती हैं। आर्थिक मोर्चे पर नए साल की शुरुआत इसी फैसले से होगी कि सरकार बचतकर्ताओं के लिए अपने इरादे किस दिशा में ले जा रही है।

Vews Verified Media or Organization • 30 May, 2019 Chief Editor

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