लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी में 500 करोड़ की एंट्री, समुद्र से निकलेगा विकास का नया रास्ता

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News Verified Public Figure • 27 Feb, 2026 Editor
Dec 14, 2025 • 8:50 PM
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लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी में 500 करोड़ की एंट्री, समुद्र से निकलेगा विकास का नया रास्ता
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लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी में 500 करोड़ की एंट्री, समुद्र से निकलेगा विकास का नया रास्ता
Business News Update: लक्षद्वीप की शांत समुद्री लहरों के बीच शनिवार को ऐसा मंथन हुआ, जिसने द्वीप समूह की आर्थिक तस्वीर बदलने का संकेत दे दिया। बंगारम द्वीप पर केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग की ओर से पहली बार आयोजित निवेशकों की बैठक में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव सामने आए। यह बैठक सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लक्षद्वीप की ब्लू इकोनॉमी को वैश्विक नक्शे पर लाने की ठोस शुरुआत मानी जा रही है। बैठक में देशभर से आए 22 निवेशक और प्रमुख उद्यमी शामिल हुए, जिन्होंने टूना और गहरे समुद्र की मछली पकड़ने, समुद्री शैवाल की खेती, सजावटी मछलियों के व्यापार और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रुचि दिखाई। सरकार की मंशा साफ दिखी—लक्षद्वीप को केवल पर्यटन का गंतव्य नहीं, बल्कि समुद्री संसाधनों पर आधारित आधुनिक अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाना। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन की मौजूदगी ने बैठक को नीति स्तर पर मजबूती दी। अधिकारियों ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि परियोजनाओं की मंजूरी में देरी अब अतीत की बात होगी। इसके लिए लक्षद्वीप में एक सिंगल-विंडो सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे निवेश प्रस्ताव तेजी से जमीन पर उतर सकें। बैठक के दौरान जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने लक्षद्वीप की संभावनाओं को नए सिरे से परिभाषित किया। भारत के कुल विशेष आर्थिक क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस छोटे से द्वीप समूह के पास है। इसके बावजूद यहां मौजूदा मछली उत्पादन करीब 15 हजार टन तक सीमित है, जबकि विशेषज्ञ इसकी वास्तविक क्षमता करीब एक लाख टन मानते हैं। खासकर टूना और गहरे समुद्र की मछलियों के लिए यह इलाका प्राकृतिक रूप से बेहद अनुकूल है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मछली पकड़ने से लेकर प्रोसेसिंग, सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और निर्यात तक की एक आधुनिक वैल्यू चेन विकसित की जाए, तो “लक्षद्वीप टूना” अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान बना सकती है। इससे स्थानीय रोजगार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा कमाने के नए रास्ते भी खुलेंगे। शैवाल की खेती को लेकर भी निवेशकों में खास उत्साह दिखा। लक्षद्वीप का 4,200 वर्ग किलोमीटर से अधिक का जलक्षेत्र इसके लिए उपयुक्त माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर समुद्री शैवाल से जुड़े खाद्य, औषधीय और बायो-प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में नर्सरी, बायोमास प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडेड उत्पादों में निवेश द्वीपों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। सजावटी मछलियों के क्षेत्र में भी लक्षद्वीप एक छुपा हुआ खजाना माना जा रहा है। यहां 300 से ज्यादा समुद्री मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय एक्वेरियम बाजार में बेहद लोकप्रिय हैं। हैचरी, ब्रूडस्टॉक डेवलपमेंट और इंटीग्रेटेड रियरिंग यूनिट्स के जरिए इस सेक्टर को संगठित रूप दिया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ निर्यात भी बढ़े। ऑफशोर केज फार्मिंग को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। ओडिशा जैसे राज्यों में सफल पायलट प्रोजेक्ट्स के बाद अब लक्षद्वीप को सतत समुद्री कृषि के अगले बड़े केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह मॉडल सही तरीके से लागू हुआ तो यह द्वीपों के युवाओं के लिए स्थायी आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। कुल मिलाकर, बंगारम में हुई यह बैठक सिर्फ निवेश प्रस्तावों की सूची नहीं थी, बल्कि लक्षद्वीप के लिए एक नए आर्थिक अध्याय की भूमिका थी—जहां समुद्र संसाधन होंगे, तकनीक होगी और स्थानीय समुदाय विकास की मुख्य धारा में होगा।

News Verified Public Figure • 27 Feb, 2026 Editor

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