SEBI का बड़ा एक्शन: ‘Baap of Charts’ नसीर अंसारी की करोड़ों की संपत्ति अटैच, रिकवरी प्रक्रिया तेज

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World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor
Dec 15, 2025 • 9:26 PM
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SEBI का बड़ा एक्शन: ‘Baap of Charts’ नसीर अंसारी की करोड़ों की संपत्ति अटैच, रिकवरी प्रक्रिया तेज
र अंसारी की करोड़ों की संपत्ति अटैच, रिकवरी प्रक्रिया तेज
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SEBI का बड़ा एक्शन: ‘Baap of Charts’ नसीर अंसारी की करोड़ों की संपत्ति अटैच, रिकवरी प्रक्रिया तेज
SEBI का बड़ा एक्शन: सोशल मीडिया पर ‘Baap of Charts’ नाम से चर्चित फिनफ्लुएंसर मोहम्मद नसीरुद्दीन अंसारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने उनके खिलाफ कड़ी रिकवरी कार्रवाई शुरू करते हुए संकेत दे दिया है कि फिनफ्लुएंसर्स की दुनिया में बिना लाइसेंस सलाह और गारंटीड मुनाफे जैसे झूठे दावों पर अब सख्त नकेल कसी जाएगी। 15 दिसंबर को जारी आदेश में सेबी ने बताया कि अंसारी पर करीब ₹21 लाख, जबकि उनकी कंपनी Golden Syndicate Ventures पर ₹17.90 करोड़ की भारी वसूली बकाया है। इसके साथ ही राहुल राव पदमाती से भी ₹2.13 लाख की रिकवरी प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है, जिसमें सेबी 2023 में ही अंसारी को ट्रेडिंग और निवेश सलाह देने से प्रतिबंधित कर चुका था।

नया एंगल: डिजिटल युग की ‘फिनफ्लुएंसर इकॉनमी’ पर सख्त पैट्रोलिंग शुरू?

फिनफ्लुएंसर संस्कृति ने पिछले कुछ वर्षों में लाखों युवा निवेशकों को प्रभावित किया है। लेकिन सेबी की हालिया कार्रवाइयों से यह साफ है कि रील्स और कोर्स बेचने की आड़ में चल रहा यह अनियंत्रित बाज़ार अब रेगुलेटरी रडार पर है। अंसारी का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण बन जाता है क्योंकि सेबी की जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति को हजारों लोग बाजार का "गुरु" मानते थे, उन्हें अपनी टीम के साथ 2.5 साल में ₹3 करोड़ का नुकसान हुआ था, जिसे उनके ग्राहकों से छुपाया गया। यानी सोशल मीडिया पर चमकती ब्रांडिंग के पीछे गहरी वित्तीय असलियत छिपाई जा रही थी।

कैसे उठा पर्दा—SEBI की जांच में क्या मिला?

सेबी के मुताबिक नसीर अंसारी ने ‘Baap of Charts’ ब्रांड के जरिए गारंटीड रिटर्न का लालच देकर निवेशकों को आकर्षित किया। बिना सेबी रजिस्ट्रेशन के इनवेस्टमेंट एडवाइजरी सेवाएं बेचीं और अपने वास्तविक ट्रेडिंग लॉस को छुपाकर मुनाफे का झूठा प्रचार किया। नियामक संस्था ने इसे निवेशकों के हितों के गंभीर उल्लंघन और धोखाधड़ी की श्रेणी में रखा है।

रिकवरी प्रक्रिया क्यों हुई तेज?

रिकवरी ऑफिसर ने 22 अगस्त 2025 को ही बैंकों और म्यूचुअल फंड हाउसों को आदेश दिया था कि अंसारी और अन्य डिफॉल्टर्स के नाम से मौजूद धनराशि और निवेश को रीडीम कर सेबी को ट्रांसफर किया जाए। लेकिन इन खातों से मिलने वाली राशि बकाया भरने के लिए पर्याप्त नहीं निकली। इसके बाद सेबी ने कड़ा कदम उठाते हुए:
  • अंसारी सहित सभी डिफॉल्टर्स की चल-अचल संपत्तियों को अटैच कर दिया
  • संपत्तियों की बेचने, ट्रांसफर करने या गिरवी रखने की अनुमति पूरी तरह रोक दी
  • 14 दिनों के भीतर सभी संपत्तियों का पूरा विवरण और मूल दस्तावेज जमा कराने का आदेश दिया
यह कार्रवाई संकेत देती है कि निवेशकों के पैसे की सुरक्षा के लिए सेबी अब “सॉफ्ट अडवाइजरी” नहीं, बल्कि हार्ड एन्फोर्समेंट के रास्ते पर है।

बड़ी तस्वीर: फर्जी फिनफ्लुएंसर्स के लिए मुश्किल दिन?

कुछ ही दिनों पहले सेबी ने एक अन्य फिनफ्लुएंसर अवधूत साठे के खिलाफ ₹546 करोड़ से अधिक की राशि इम्पाउंड करने का आदेश दिया था। लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों ने बाजार में संदेश साफ कर दिया है— सोशल मीडिया पर निवेश सलाह बेचना अब बिना जवाबदेही के संभव नहीं होगा। निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए यह सख्ती आवश्यक मानी जा रही है, क्योंकि डिजिटल स्पेस में बढ़ती लोकप्रियता अक्सर भरोसे का ऐसा बुलबुला बना देती है, जो टूटने पर हजारों लोगों की मेहनत की बचत को डुबो सकता है।

World Desk Verified Public Figure • 28 Feb, 2026 Editor

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